असम में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन इससे प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। पानी उतरने के बाद खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, जबकि घरों, स्कूलों और सड़कों पर जमी गाद ने लोगों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रभावित परिवार सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नुकसान का दायरा काफी बड़ा है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 26 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बाढ़ से दो और लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही इस वर्ष बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। वहीं, धनसिरी (नुमालीगढ़) नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे कई इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है।
फिलहाल राज्य के नौ जिले—चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, होजाई, कामरूप, कामरूप (मेट्रो), नगांव और डिब्रूगढ़—बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 24 राजस्व मंडलों के 763 गांवों में करीब 5,24,733 लोग प्रभावित हैं। इसके अलावा 48,742.09 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी जलमग्न है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद राज्य के सभी मंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। राहत एवं पुनर्वास कार्यों की निगरानी लगातार की जा रही है।
राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए 109 राहत शिविर और 245 राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। इन शिविरों में 37,724 लोग रह रहे हैं, जबकि 1,53,833 अन्य लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत कार्यों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से जुटे हुए हैं। इसके अलावा 152 मेडिकल टीमें, 36 नावें और दो हेलीकॉप्टर भी राहत अभियान में लगाए गए हैं।
बाढ़ के कारण हजारों पशु प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में बह भी गए हैं। वहीं सैकड़ों कच्चे और पक्के मकानों, मवेशी शेड, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। सरकार ने राहत सामग्री के रूप में चावल, दाल, नमक, सरसों का तेल और पशुओं के लिए चारा वितरित किया है तथा क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।