कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा को लेकर विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्टॉल और पूजा आयोजनों के नाम को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा के दौरान लगाए जाने वाले स्टॉल और आयोजनों में ‘शारदोत्सव’ की जगह ‘दुर्गापूजा’ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले आयोजनों को अनुमति नहीं दी जाएगी।
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गापूजा एक सार्वजनिक उत्सव के रूप में मनाई जाती है और इसमें सभी समुदायों की भागीदारी होती है। उन्होंने धार्मिक पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति या समुदाय के साथ भेदभाव किए जाने को अनुचित बताया। उनका कहना था कि हर व्यक्ति को अपने धर्म और परंपराओं के पालन की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान यदि तनाव की स्थिति बनती है तो उसे नियंत्रित करने की जिम्मेदारी पुलिस की है। जनप्रतिनिधियों को कानून हाथ में लेने या लाठी लेकर सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
धार्मिक पहचान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र पहनने, शिखा रखने या धार्मिक माला धारण करने वाले किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के कारण निशाना नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध और अन्य समुदायों के लोगों को अपने-अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दिए जाने पर जोर दिया।
दुर्गापूजा समितियों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नियमों का पालन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पूजा आयोजन और सरकारी सहायता से संबंधित निर्धारित प्रावधानों का पालन अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने वाले आयोजनों और स्टॉल के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद दुर्गापूजा आयोजनों के नामकरण और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा तेज होने की संभावना है।