नई दिल्ली। सिंगापुर में भारतीय नागरिकों को फर्जी कॉल के जरिए ठगने के मामले में वर्ष 2013 से फरार चल रहे वांछित आरोपी हरनेक सिंह को आखिरकार भारत लाया गया है। अमेरिका से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उसे नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस और लुक-आउट सर्कुलर पहले से जारी था।
सीबीआई के अनुसार, इस मामले में वर्ष 2016 में साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 में भारत से संचालित गिरोह सिंगापुर में रहने वाले भारतीय नागरिकों को स्पूफ्ड कॉल करता था। आरोपी खुद को सिंगापुर का आव्रजन अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे कि उन्होंने एयरपोर्ट पर जरूरी फॉर्म में गलत जानकारी दी है और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।
इसके बाद पीड़ितों को कथित कानूनी कार्रवाई और निर्वासन से बचाने के नाम पर जुर्माना या सेटलमेंट फीस जमा करने के लिए मजबूर किया जाता था। उनसे वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए भारत में रकम भेजने को कहा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से हासिल रकम हरनेक सिंह अपने सह-आरोपियों आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के साथ संचालित मनी-ट्रांसफर आउटलेट के माध्यम से हासिल करता था।
अपराध के बाद हरनेक सिंह मई 2013 में भारत छोड़कर फरार हो गया और बाद में अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल हो गया। वह एक दशक से अधिक समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा।
इस बीच पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में उसके सह-आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला और आदित्य भारद्वाज तथा दीपक जैन को 26 मई 2025 को दोषी ठहराया गया। हरनेक के खिलाफ अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया। अब भारत लौटने के बाद CBI उसे पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश करेगी।