कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग के समक्ष शनिवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपना पक्ष रखा। करीब एक घंटे 20 मिनट चली बैठक के बाद ऋतब्रत ने दावा किया कि आयोग की ओर से पूछे गए सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं और मांगे गए जरूरी दस्तावेज भी जमा करा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि उनका गुट चुनाव चिह्न हासिल करने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
ऋतब्रत गुट की ओर से आयोग के कार्यालय पहुंचने वालों में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप राय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमान और अधिवक्ता अमन झा शामिल रहे। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ऋतब्रत ने कहा कि आयोग के समक्ष तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दावा पेश किया गया है। उनके मुताबिक, गुट ने केवल आरोप या दावे नहीं किए, बल्कि अपने पक्ष के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज भी सौंपे हैं।
इस दौरान ऋतब्रत ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी में अब किसी एक व्यक्ति की इच्छा को ही अंतिम निर्णय मानने की व्यवस्था नहीं चलेगी। ऋतब्रत ने तृणमूल कांग्रेस को किसी परिवार की पार्टी मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह जमीनी कार्यकर्ताओं की पार्टी है।
उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस किसी परिवार की पार्टी नहीं है। तृणमूल कांग्रेस किसी की बपौती नहीं है।” खास बात यह रही कि उनके साथ ममता बनर्जी के पुराने समर्थक माने जाने वाले चंद्रिमा भट्टाचार्य और अरूप राय भी मौजूद थे।
ऋतब्रत ने आयोग से जल्द फैसला सुनाने का अनुरोध किया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर है। ऐसे में दोनों गुट चाहते हैं कि इससे पहले चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति साफ हो जाए, ताकि उपचुनाव में पार्टी के नाम और प्रतीक को लेकर कोई भ्रम न रहे।