नई दिल्ली। भारत के टेलीविजन बाजार में दर्शकों की पसंद और चैनलों की लोकप्रियता मापने वाली टीवी रेटिंग व्यवस्था एक महीने से अधिक समय से ठप है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश के बाद ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने 1 जुलाई से टेलीविजन दर्शक माप और रेटिंग का काम रोक रखा है। BARC के पंजीकरण नवीनीकरण पर फैसला होने तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना है।
टीवी रेटिंग के आंकड़े विज्ञापन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विज्ञापनदाता तय करते हैं कि किस चैनल या कार्यक्रम पर कितना खर्च किया जाए। ऐसे में लंबे समय तक रेटिंग उपलब्ध नहीं होने से विज्ञापन कंपनियों और प्रसारण संस्थानों के सामने अनिश्चितता बढ़ गई है।
हालांकि जुलाई में इसका तत्काल बड़ा असर इसलिए नहीं दिखा, क्योंकि उस अवधि के अधिकांश विज्ञापन सौदे पहले ही तय किए जा चुके थे। लेकिन अगस्त से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन को लेकर उद्योग की चिंता बढ़ गई है। आमतौर पर त्योहारों के दौरान टेलीविजन पर विज्ञापन खर्च में तेजी आती है। यदि रेटिंग का संकट जारी रहता है तो कई विज्ञापनदाता टीवी पर अपने बजट को लेकर नए सिरे से विचार कर सकते हैं।
मौजूदा समय में पारंपरिक टीवी पर विज्ञापन खर्च भी दबाव में है। अनुमान के मुताबिक, टीवी विज्ञापन खर्च 2023 में करीब 31,200 करोड़ रुपये था, जो 2025 में घटकर करीब 26,300 करोड़ रुपये रह सकता है। ऐसे माहौल में रेटिंग आंकड़ों का अभाव प्रसारण उद्योग के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है।
इसका असर सभी चैनलों पर समान नहीं पड़ेगा। जियोस्टार, जी और सोनी जैसे बड़े नेटवर्क पुराने दर्शक आंकड़ों और अपनी बाजार हिस्सेदारी के आधार पर विज्ञापन हासिल करने की स्थिति में रह सकते हैं। वहीं क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों और छोटे इलाकों को लक्षित करने वाले ब्रांडों के लिए मुश्किलें अधिक बढ़ सकती हैं।
नई टेलीविजन रेटिंग नीति का उद्देश्य रेटिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और दूसरी कंपनियों के प्रवेश को आसान बनाना है। नीति के तहत कम से कम 80,000 मीटर लगाने की व्यवस्था है, जबकि BARC के मौजूदा सिस्टम में करीब 58,000 मीटर हैं। आगे इनकी संख्या बढ़ाकर 1.20 लाख तक करने की योजना है। उद्योग की नजर अब इस बात पर है कि BARC के पंजीकरण नवीनीकरण पर फैसला कब होता है और टीवी रेटिंग व्यवस्था कब सामान्य होती है।