नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में गुरुवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में पार्टी के महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनावों के परिणाम, विपक्षी दलों के बीच समन्वय और कुछ राजनीतिक दलों में उभर रहे अंदरूनी मतभेदों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति पर व्यापक चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे प्रचार अभियान का राजनीतिक जवाब तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को लेकर बन रहे राजनीतिक माहौल पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व ने जनता के बीच अपने राजनीतिक संदेश को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया।
बैठक में दल-बदल की बढ़ती घटनाओं, विपक्षी दलों के बीच तालमेल मजबूत करने और विभिन्न राज्यों में संभावित सहयोगी दलों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी मंथन किया गया। माना जा रहा है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया (INDIA) को और मजबूत बनाने के लिए भी कई सुझाव सामने आए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कुछ सांसदों की भूमिका को लेकर उठ रही अटकलों और विपक्षी एकजुटता पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर भी बैठक में विचार किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने विपक्षी दलों के बीच संवाद और सहयोग बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक के दौरान इंडिया गठबंधन की हालिया बैठक में लिए गए निर्णयों की भी समीक्षा की गई। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने बताया कि गठबंधन की पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दों पर बेहतर समन्वय के लिए हर दो महीने में बैठक करेंगी। अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है। इसके अलावा चुनावी अनियमितताओं, मतदाता सूची और परीक्षा संबंधी विवादों जैसे मुद्दों पर विपक्ष की संयुक्त रणनीति को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।