नई दिल्ली। ओमान की खाड़ी में एक वाणिज्यिक टैंकर पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ गया है। केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को जानकारी दी कि इस घटना में लापता तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। हादसे के बाद भारत सरकार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए अमेरिकी कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार, ओमान के तट के निकट संचालित टैंकर ‘सेटेबेल्लो’ पर अमेरिकी सेना ने हमला किया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जहाज ने बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद उसे निशाना बनाया गया। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि संबंधित टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और उस पर जारी समुद्री निगरानी अभियान के तहत कार्रवाई की गई।
घटना के बाद भारत ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए नई दिल्ली स्थित अमेरिकी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन को तलब किया। विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने अमेरिकी चार्ज डी-अफेयर्स जेसन मीक्स से मुलाकात कर भारत की गंभीर चिंता और आपत्ति दर्ज कराई। भारत ने इस हमले की निंदा करते हुए जहाज पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हमले के समय टैंकर पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। इनमें से 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन नाविकों के लापता होने की पुष्टि हुई थी। बाद में उनके मृत होने की जानकारी सामने आई।
रिपोर्टों के मुताबिक, यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि 9 जून की रात ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे समुद्री प्रतिबंध अभियान के दौरान पलाऊ के झंडे वाले इस जहाज को निशाना बनाया गया। अमेरिकी बयान के अनुसार, एक सैन्य विमान ने जहाज के इंजन रूम पर सटीक हथियारों से हमला किया, जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय तनाव और विदेशी जलक्षेत्र में सैन्य कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भारत ने मामले की विस्तृत जांच और प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।