रुपये में अचानक बड़ी गिरावट, जानिए क्यों बढ़ा डॉलर का दबदबा?

मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 32 पैसे टूटकर 95.57 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की निकासी, घरेलू शेयर बाजारों की कमजोरी और डॉलर की मजबूती ने भी भारतीय मुद्रा को प्रभावित किया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.55 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार के शुरुआती घंटों में ही इसमें और गिरावट दर्ज की गई और यह 95.57 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को रुपया 16 पैसे की मजबूती के साथ 95.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिली थी। हालांकि गुरुवार को बाजार की धारणा एक बार फिर कमजोर पड़ गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। इस कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रुपये पर पड़ता है।

इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी निकाले जाने और घरेलू शेयर बाजारों में कमजोर रुख ने भी रुपये की स्थिति को प्रभावित किया है। निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है।

इस बीच छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.01 प्रतिशत बढ़कर 99.95 पर पहुंच गया। डॉलर की यह मजबूती भी उभरते बाजारों की मुद्राओं के लिए चुनौती बन रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की संभावित हस्तक्षेप नीति रुपये को अत्यधिक गिरावट से बचाने में मदद कर सकती है। बाजार की नजर अब वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी हुई है, जो आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेंगे।

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