भारत से पाकिस्तान भेजी गई खास पालकी साहिब, जानिए क्यों है यह धार्मिक पहल इतनी महत्वपूर्ण

 अमृतसर। भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने वाली एक विशेष पहल के तहत प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के पावन जन्मस्थान गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब के लिए भारत से एक भव्य गोल्डन फाइबर पालकी साहिब पाकिस्तान भेजी गई है। इस पवित्र पालकी को बुधवार को अमृतसर स्थित अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पूरे सम्मान और धार्मिक मर्यादा के साथ पाकिस्तान रवाना किया गया।

जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के सिंध प्रांत निवासी सिख श्रद्धालु भाई महेश सिंह ने विशेष रूप से इस पालकी साहिब को तैयार कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद भारत में इसे सुंदर और आकर्षक स्वरूप में तैयार किया गया। यह पालकी गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब में स्थापित की जाएगी, जहां देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकेंगे।

पालकी साहिब को सीमा पार भेजने के लिए भारतीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं। भारतीय कस्टम विभाग के कमिश्नर ए.पी. चौधरी, सुपरिंटेंडेंट अशोक कुमार तथा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों ने कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को सुचारू रूप से पूरा कराया। सभी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पालकी साहिब को पाकिस्तान कस्टम विभाग को सौंप दिया गया।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के जत्था लीडर भाई भूपिंदर सिंह भलवान ने बताया कि वाघा सीमा पर पाकिस्तान के प्रमुख सिख नेता रमेश सिंह अरोड़ा और भाई महेश सिंह के प्रतिनिधियों को यह पालकी औपचारिक रूप से सौंपी जाएगी। इसके बाद इसे ननकाना साहिब गुरुद्वारा ले जाया जाएगा।

इस पहल का दोनों देशों के सिख समुदाय और धार्मिक संगठनों ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह कदम गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं—प्रेम, भाईचारे, शांति और मानव सेवा—का सजीव उदाहरण है। उनका कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान न केवल आस्था को मजबूत करता है, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी विश्वास और सौहार्द बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह पहल साझा विरासत और आध्यात्मिक जुड़ाव को नई मजबूती देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.