विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत का ऐसा दबदबा, जिसे देखकर दुनिया रह गई हैरान!

 अहमदाबाद। पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में मेजबान भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। पांच दिनों तक चली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने 102 स्वर्ण पदकों सहित कुल 114 पदक जीतकर पदक तालिका में एकतरफा वर्चस्व कायम किया। भारत की इस ऐतिहासिक सफलता ने योगासन के क्षेत्र में देश की वैश्विक श्रेष्ठता को एक बार फिर साबित कर दिया।

अहमदाबाद के ईकेए एरिना में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दुनिया भर के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। भारतीय प्रतिभागियों ने लगभग सभी आयु वर्गों और स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी। प्रतियोगिता के दौरान भारतीय खिलाड़ियों की तकनीकी दक्षता, संतुलन और लचीलापन दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

पदक तालिका में जापान दूसरे स्थान पर रहा। जापानी खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण, तीन रजत और पांच कांस्य पदक जीतकर कुल 11 पदक अपने नाम किए। वहीं अर्जेंटीना ने तीसरा स्थान हासिल किया। अर्जेंटीना की खिलाड़ी नाबिला बर्राजा प्रतियोगिता की सबसे सफल व्यक्तिगत एथलीट बनकर उभरीं। उन्होंने दो स्वर्ण और तीन रजत पदक जीतकर अपनी टीम को शीर्ष देशों में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कुल पदकों की संख्या के आधार पर नेपाल भारत के बाद दूसरा सबसे सफल देश रहा। नेपाल ने एक स्वर्ण, 36 रजत और 15 कांस्य पदकों के साथ कुल 52 पदक हासिल किए। वहीं उज्बेकिस्तान ने भी 25 पदकों के साथ प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें से 31 देशों के खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहे। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योगासन अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

प्रतियोगिता के अंतिम दिन भी भारतीय खिलाड़ियों ने आर्टिस्टिक पेयर, रिदमिक पेयर, हैंड बैलेंस, बैक बेंड, ट्विस्टिंग बॉडी और सुपाइन इंडिविजुअल जैसी स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। भारत की इस ऐतिहासिक सफलता को योग की वैश्विक स्वीकार्यता और भारतीय संस्कृति की बड़ी जीत माना जा रहा है।

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