उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सरकारी परियोजनाओं में अनावश्यक खर्च और लागत वृद्धि पर सख्त रुख अपनाते हुए विभागों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। सचिवालय में उनकी अध्यक्षता में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा की गई और आवश्यक संस्तुतियां प्रदान की गईं।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने पंपिंग पेयजल योजनाओं को अधिक किफायती और टिकाऊ बनाने के लिए सोलर पावर आधारित संचालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी नई पंपिंग पेयजल परियोजनाओं में सोलराइजेशन की संभावनाओं का अनिवार्य रूप से अध्ययन किया जाए। साथ ही नियोजन विभाग को इस संबंध में आवश्यक शासनादेश जारी करने के भी निर्देश दिए गए, ताकि भविष्य की परियोजनाएं ऊर्जा दक्ष और कम खर्चीली बन सकें।
मुख्य सचिव ने विभागों द्वारा कंसल्टेंट्स को प्रोजेक्ट लागत के प्रतिशत के आधार पर भुगतान किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहले जारी किए गए निर्देशों के अनुसार कंसल्टेंट्स को फीस लमसम (एकमुश्त) आधार पर ही दी जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित शासनादेश को दोबारा सभी विभागों को भेजने और उसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने परियोजनाओं की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि यदि किसी एजेंसी के गलत आकलन के कारण लागत बढ़ती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। मुख्य सचिव ने नियोजन विभाग को लोक निर्माण विभाग के सहयोग से कॉस्ट वेरिएशन के लिए स्पष्ट गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए, जिससे सरकारी परियोजनाओं में अनावश्यक लागत वृद्धि पर रोक लगाई जा सके।
बैठक में आयुष क्षेत्र की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में आयुष के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और इस दिशा में गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने बागेश्वर के गरुड़ स्थित आईटीआई के प्रस्ताव पर छात्रों की सुविधा के लिए हॉस्टल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्रीधर बाबू अड्डांकी, सी. रविशंकर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।