देहरादून। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्राथमिक स्तर पर शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने के बावजूद उत्तराखंड में व्यायाम शिक्षकों की भर्ती नहीं होने से हजारों प्रशिक्षित युवा निराश हैं। प्रदेश में बीपीएड और एमपीएड डिग्रीधारी करीब 12 हजार से अधिक बेरोजगार युवा नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन वर्ष 2006 के बाद से शिक्षा विभाग में उनके लिए कोई नियमित भर्ती नहीं हुई है।
स्थिति यह है कि कई अभ्यर्थी व्यायाम शिक्षक बनने की उम्मीद में आयु सीमा तक पार कर चुके हैं। प्राथमिक शिक्षा में तो शारीरिक शिक्षकों के पद ही सृजित नहीं किए गए हैं, जबकि नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद प्राथमिक से इंटरमीडिएट स्तर तक शारीरिक शिक्षा विषय को अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में प्रशिक्षित युवाओं का कहना है कि नियमावली में संशोधन कर पद सृजित किए जाएं और शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान राज्य मंत्री गीता राम गौड़ भी मौजूद रहीं। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति से अवगत कराया और शीघ्र भर्ती की मांग रखी।
बताया गया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को व्यायाम शिक्षक भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। संगठन पदाधिकारियों ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री और राज्य मंत्री का आभार व्यक्त किया है।
अब प्रशिक्षित युवाओं को उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी और उनकी वर्षों पुरानी हसरत पूरी हो सकेगी।