देहरादून। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) में आयोजित एचआर कॉन्क्लेव 2026 राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग और शिक्षा जगत के बीच एक महत्वपूर्ण संवाद के रूप में उभरा। इस कॉन्क्लेव में 20 से अधिक प्रतिष्ठित संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को तेजी से बदलते कार्यस्थल के अनुरूप तैयार करना और रोजगार क्षमता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करना था।
इस वर्ष सम्मेलन का केंद्रीय विषय रहा — *“नई पीढ़ी को हुनरमंद बनाना: उम्मीदें बनाम सच्चाई।”* कॉन्क्लेव में ग्रेजुएट छात्रों की रोजगार योग्यता और उद्योग की अपेक्षाओं के बीच बढ़ते अंतर पर गंभीर मंथन किया गया। चर्चा के दौरान दो प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया— *“प्लग-अँड-प्ले ऑर ट्रेन-अँड-ट्रांसफॉर्म?”* तथा *“एम्प्लॉयबिलिटी वर्सेस वर्क रेडीनेस: व्हेयर एजुकेशन एंड्स एंड इंडस्ट्री बिगिन्स।”*
कार्यक्रम में इन्फोसिस बीपीएम, नोवार्टिस, कल्याणी ग्रुप, एसकेएफ इंडिया, यूनाइटेड एयरलाइंस, विप्रो इंजीनियरिंग, मेट्रो ग्लोबल सॉल्यूशंस, बीएनवाई मेलॉन, पीडब्ल्यूसी और इनोमैटिक्स रिसर्च लैब्स सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के एचआर लीडर्स शामिल हुए। विशेषज्ञों ने बताया कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों में व्यवहारिक कौशल, अनुकूलन क्षमता और व्यावसायिक समझ विकसित करना आवश्यक है।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के वाइस-चांसलर डॉ. आर. एम. चिटनिस ने कहा कि एचआर पेशेवर कर्मचारियों की प्रगति और संतुष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें स्वयं के मानसिक और शारीरिक संतुलन पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि खुश और संतुलित कर्मचारी ही संगठन को मजबूत बनाते हैं।
नोवार्टिस के एडी एचआर विक्रम कुलकर्णी ने कहा, “तेज दौड़ने के लिए कभी-कभी रुकना भी जरूरी है। काम का दबाव संतुलित होना चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य पर नेतृत्व स्तर से पहल होनी चाहिए।”