गुरुग्राम।
गुरुग्राम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (जीसीसीआई) ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा चुनिंदा आयात वस्तुओं पर शुल्क में कटौती के फैसले का स्वागत करते हुए इसे भारतीय उद्योग और निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राहत करार दिया है। चैंबर का मानना है कि यह कदम भारत के निर्यात-उन्मुख उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।
जीसीसीआई के अध्यक्ष विकास जैन ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में अमेरिका की उच्च शुल्क नीति के कारण भारतीय परिधान उद्योग, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बढ़े हुए शुल्क के चलते भारतीय उत्पादों की लागत में वृद्धि हुई, जिससे उनकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हुई और निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ा।
उन्होंने कहा कि शुल्क में कमी से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी और व्यापार संतुलन को दोबारा स्थापित करने में मदद मिलेगी। यह फैसला न केवल लागत दबाव को कम करेगा, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती से टिके रहने का अवसर भी देगा।
विकास जैन के अनुसार, अमेरिकी शुल्क कटौती से निर्यात गतिविधियों में नई जान आएगी, उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग संभव होगा और कई निर्यात इकाइयों को दोबारा गति मिलेगी, जो पहले धीमी पड़ गई थीं। इसके साथ ही यह सकारात्मक संकेत नए निवेश को आकर्षित करेगा, जिससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।
जीसीसीआई ने यह भी कहा कि यह निर्णय भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से न केवल व्यापार का विस्तार होगा, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को भी मजबूती मिलेगी।
चैंबर का मानना है कि यदि भविष्य में इस तरह के और व्यापार-अनुकूल निर्णय लिए जाते हैं, तो भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकेगा। जीसीसीआई ने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंध आने वाले समय में नई ऊंचाइयों को छुएंगे।