ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के अनुभवी और भरोसेमंद बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेला जाने वाला पांचवां एशेज टेस्ट उनके शानदार करियर का अंतिम मुकाबला होगा। यह मुकाबला उनके लिए भावनात्मक रूप से भी बेहद खास रहेगा, क्योंकि यहीं से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था।
39 वर्षीय ख्वाजा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने परिवार की मौजूदगी में संन्यास का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि टीम को इसकी जानकारी अभ्यास सत्र से ठीक पहले दी गई। भावुक होते हुए ख्वाजा ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें पहचान दी, सम्मान दिया और जीवन को दिशा दी।
ख्वाजा ने स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से भले ही विदा ले रहे हों, लेकिन घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। वह आगे भी बिग बैश लीग में ब्रिस्बेन हीट और शेफील्ड शील्ड में क्वींसलैंड टीम के लिए खेलते नजर आएंगे।
सिडनी टेस्ट उनके करियर का 88वां और आखिरी टेस्ट होगा। इसी मैदान पर उन्होंने 2011 में टेस्ट डेब्यू किया था। अब 30 रन बनाते ही वह माइकल हसी को पीछे छोड़ते हुए ऑस्ट्रेलिया के सर्वकालिक रन स्कोररों की सूची में 14वें स्थान पर पहुंच जाएंगे।
ख्वाजा का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। एक समय उनका टेस्ट औसत 25 तक गिर गया था, लेकिन 2015-16 सीजन में उन्होंने जबरदस्त वापसी की। 2018 में पाकिस्तान के खिलाफ दुबई में खेली गई 141 रनों की पारी और 2023 एशेज में एजबेस्टन टेस्ट की ऐतिहासिक पारियां उनके करियर की पहचान बन गईं।
वह ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर रहे, जिन्होंने नस्लवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए रास्ता आसान किया। अपने करियर पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि लोग मुझे एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में याद रखें जिसने खेल का सम्मान किया और दिल से खेला।”
सिडनी टेस्ट के साथ ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का एक यादगार अध्याय समाप्त होने जा रहा है, लेकिन उस्मान ख्वाजा की प्रेरक कहानी आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।