देहरादून में एक साथ 7 जगह बजा आपदा अलर्ट, जानिए कैसे हुआ मेगा रेस्क्यू अभ्यास

देहरादून: मानसून के दौरान संभावित बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गुरुवार को देहरादून जिले के सात संवेदनशील स्थानों पर एक साथ व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों, विभिन्न विभागों के समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता का वास्तविक परीक्षण करना था।

मॉक ड्रिल के दौरान जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को काल्पनिक सूचना मिली कि भारी बारिश के कारण जिले के सात अलग-अलग क्षेत्रों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें कई लोग फंस गए हैं। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय किया गया और सभी संबंधित विभागों की टीमें तुरंत घटनास्थलों के लिए रवाना कर दी गईं। अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा कंट्रोल रूम से पूरे अभियान की लगातार निगरानी करते रहे।

सहस्रधारा और कार्लीगाड़ क्षेत्र में नदी का जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया। गौहरीमाफी में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को नाव और राफ्ट की मदद से राहत शिविरों तक पहुंचाया गया। जमनीपुर-सहसपुर क्षेत्र में जलभराव से प्रभावित लोगों का रेस्क्यू कर घायलों को अस्पताल भेजा गया।

वहीं लंबीधार-किमाड़ी मार्ग पर भूस्खलन के कारण बंद सड़क को जेसीबी मशीनों से मलबा हटाकर खोला गया। दूधली क्षेत्र में भारी वर्षा की काल्पनिक स्थिति बनाकर बिजली आपूर्ति बंद की गई और जलभराव में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। चकराता-त्यूनी मार्ग पर भी भूस्खलन के बाद राहत सामग्री वितरित कर मार्ग को एक घंटे के भीतर सुचारु करने का अभ्यास किया गया।

अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा ने मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि ऐसे पूर्वाभ्यास से विभागों के बीच समन्वय मजबूत होता है और आपदा के समय संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभ्यास के दौरान सामने आई कमियों का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।

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