इस्लामाबाद। पाकिस्तान के दो सबसे अशांत प्रांतों बलोचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा में हालिया हिंसक घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा हालात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलग-अलग मुठभेड़ों और हमलों में कुल नौ पाकिस्तानी सैनिक और नौ विद्रोही मारे जाने की खबर है। इन घटनाओं को लेकर बलोच विद्रोही संगठनों और पाकिस्तान सेना के दावों में स्पष्ट विरोधाभास भी सामने आया है।
द बलोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, आज़ादी समर्थक सशस्त्र संगठन बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि उसने बलोचिस्तान के क्वेटा, कच्ची और केच जिलों में तीन अलग-अलग हमलों में पाकिस्तान सेना के छह जवानों को मार गिराया। बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलोच के अनुसार, पहला हमला क्वेटा के बाहरी इलाके डाघारी में रिमोट-कंट्रोल आईईडी के जरिए किया गया, जिसमें चार सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई और दो घायल हो गए।
दूसरा हमला कच्ची जिले के धदार क्षेत्र में किया गया, जबकि तीसरा हमला केच जिले के कुलाग इलाके में स्थित सामी में सेना की एक पोस्ट पर देर रात किया गया, जिसमें दो सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है।
इसी बीच, बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने भी 18 से 20 दिसंबर के बीच नुश्की, टंप और दश्त इलाकों में चार हमले करने का दावा किया है। संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलोच के अनुसार, 18 दिसंबर को नुश्की के जर्रिन जंगल क्षेत्र में सेना के वाहन को निशाना बनाकर विस्फोट किया गया, जिसमें तीन जवान मारे गए और दो घायल हुए।
दूसरी ओर, पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने खैबर-पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई का ब्योरा जारी किया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसपीआर ने बताया कि केपी प्रांत में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के नौ लड़ाकों को मार गिराया गया। इनमें डेरा इस्माइल खान जिले में हुई मुठभेड़ में चार और बन्नू जिले में हुई कार्रवाई में पांच विद्रोही मारे गए।
इन घटनाओं ने पाकिस्तान के पश्चिमी हिस्सों में जारी अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।