नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनरेगा की जगह वीबी-जी राम जी योजना लागू किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने इसे गरीब मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि यह केवल एक योजना का बदलाव नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त काम के अधिकार को समाप्त करने की सोची-समझी साजिश है।
एक राष्ट्रीय अखबार में लिखे अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि बिना संसद में चर्चा, राज्यों से परामर्श और संघीय ढांचे के सम्मान के मनरेगा की मूल आत्मा को खत्म कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम दूरगामी और विनाशकारी होंगे।
सोनिया गांधी ने लिखा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल में संविधान के अनुच्छेद 41 से प्रेरित होकर लागू किया गया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना रही है, जिसने ग्रामीण गरीबों को कानूनी रूप से रोजगार का अधिकार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था के तहत कानूनी गारंटी, मांग आधारित काम, सालभर रोजगार और ग्राम सभा की केंद्रीय भूमिका को समाप्त कर दिया गया है। नई योजना में रोजगार के दिनों को बजटीय सीमा से बांध दिया गया है, जिससे राज्यों में काम के अवसर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर हो जाएंगे।
सोनिया गांधी ने इसे केंद्रीकरण की पराकाष्ठा करार देते हुए कहा कि 73वें संविधान संशोधन के तहत ग्राम सभा को मिले अधिकार छीने जा रहे हैं और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत ऊपर से थोपी गई व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने 100 दिन से 125 दिन रोजगार बढ़ाने के सरकारी दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि वास्तविकता में रोजगार के अवसर कम होंगे।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा साबित हुई थी। मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से ग्रामीण भारत में गंभीर सामाजिक संकट पैदा होगा।