‘पूर्व सैनिक हैं राष्ट्र निर्माण की शक्ति’—दिल्ली में राज्यपाल गुरमीत सिंह का बड़ा संदेश

नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल **गुरमीत सिंह** ने नई दिल्ली में आयोजित **राष्ट्रीय सैनिक संस्था** के 18वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने संस्था के सदस्यों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया और पूर्व सैनिकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण की जीवंत ऊर्जा बताया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था केवल पूर्व सैनिकों का मंच नहीं, बल्कि यह अनुभव और युवा शक्ति को एक सूत्र में पिरोकर समाज को नई दिशा देने वाली सशक्त शक्ति है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त सैनिक समाज की चलती-फिरती अकादमी के समान होते हैं, जिनका अनुभव राष्ट्र के लिए अमूल्य है। वर्दी उतरने के बाद भी सैनिक का दायित्व समाप्त नहीं होता, बल्कि वह समाज सेवा के रूप में और विस्तृत हो जाता है।

राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और युवाओं के मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को अनुशासित और सजग नेटवर्क की आवश्यकता है, जिसमें पूर्व सैनिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सेना में बिताया गया समय युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को मजबूत करता है।

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री **नरेंद्र मोदी** की ‘वाइब्रेंट विलेज’ परिकल्पना के तहत सीमा के गांवों को देश के “प्रथम गांव” के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। पलायन रोकना और सीमांत क्षेत्रों को सशक्त बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि नया भारत आत्मविश्वास के साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। एआई, ड्रोन और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक आयामों के साथ भारत वैश्विक नेतृत्व की दिशा में बढ़ रहा है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने प्रत्येक नागरिक से सैनिक की भांति अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

 

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