“बिना चुनाव मंत्री! बिहार में परिवारवाद का नया मॉडल लॉन्च”
आफ़रीन हुसैन
बिहार में सत्ता का समीकरण बदलता नहीं है
बस चेहरे बदलते हैं, तरीके वही रहते हैं।
एक बार फिर सिद्ध हो गया कि यहाँ लोकतंत्र का असली अर्थ “जनता की सरकार” नहीं, बल्कि “परिवार की सरकार” है। कांग्रेस को परिवारवाद का गढ़ बताकर दूसरों ने अपनी राजनीति चमकाई थी, पर बिहार चुनाव के बाद जो…
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