आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में माइग्रेन एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। लगातार तनाव, अनियमित दिनचर्या, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग तथा पर्याप्त नींद की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने माइग्रेन से राहत पाने के लिए योग को एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय बताया है।
हाल ही में मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई जानकारी में कहा कि नियमित योगाभ्यास माइग्रेन के लक्षणों को नियंत्रित करने और इसके दौरे की तीव्रता को कम करने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन केवल सामान्य सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें सिर के एक हिस्से में तेज दर्द के साथ मतली, चक्कर, तेज रोशनी और तेज आवाज से परेशानी जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठकर काम करना, मानसिक तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी गर्दन, कंधों और सिर की मांसपेशियों में तनाव बढ़ाती है। यही तनाव धीरे-धीरे माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकता है। ऐसे में केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय योग को दिनचर्या में शामिल करना अधिक लाभदायक साबित हो सकता है।
आयुष मंत्रालय ने माइग्रेन से राहत के लिए भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी आसन और ताड़ासन को विशेष रूप से उपयोगी बताया है। भुजंगासन रीढ़ और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जबकि पवनमुक्तासन पाचन तंत्र को बेहतर बनाकर गैस और अपच की समस्या कम करने में मदद करता है। मार्जरी आसन गर्दन और पीठ के तनाव को दूर करता है, वहीं ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
इसके अलावा भ्रामरी और शीतली प्राणायाम भी माइग्रेन के मरीजों के लिए फायदेमंद बताए गए हैं। भ्रामरी प्राणायाम तनाव और मानसिक बेचैनी को कम करता है, जबकि शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुंचाकर मानसिक शांति प्रदान करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित योगाभ्यास न केवल माइग्रेन बल्कि संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।