नेचरनोमिक्स रिसर्च कॉन्क्लेव 2025:  पूर्वी हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन के लिए विशेषज्ञों का महासम्मेलन

गुवाहाटी । बालीपाड़ा फाउंडेशन और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नेचरनोमिक्स रिसर्च कॉन्क्लेव 2025 का शुक्रवार को भव्य उद्घाटन हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में पूर्वी हिमालय तथा पूर्वोत्तर पहाड़ियों के पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन और पुनर्योजी विकास पर गहन विचार-विमर्श हो रहा है।

इसमें देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधार्थी तथा सामुदायिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ननी गोपाल महंत ने की। मुख्य अतिथि कॉटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र डेका, अमेरिका के वाशिंगटन राज्य पारिस्थितिकी विभाग के प्रमुख जलविज्ञानी डॉ. दिवाकर गोस्वामी तथा गुवाहाटी विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के डीन प्रो. के. तयुंग थे। मुख्य वक्ता के रूप में गुवाहाटी विश्वविद्यालय के उत्कृष्टता प्राध्यापक प्रो. बी.एन. गोस्वामी ने संबोधित किया।

एक सहयोगात्मक मंच के रूप में डिज़ाइन यह सम्मेलन 300 से अधिक छात्रों, शोधकर्ताओं और सामुदायिक नेताओं को एकजुट कर रहा है। इससे अंतःविषय संवाद को बल मिल रहा है तथा पूर्वी हिमालय की पारिस्थितिक व सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के नवीन समाधान सह-निर्मित हो रहे हैं।

पर्यावरण एवं सामाजिक विज्ञान के विद्वानों द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुति
आयोजन के दौरान नवाचारी समाधानों हेतु विचार-मंथन सत्र, वैज्ञानिक अनुसंधान को परंपरागत पारिस्थितिक ज्ञान से जोड़ने वाली कार्यशालाएँ एवं संवाद और विशेषज्ञों व जमीनी कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित आउटडोर शिक्षण सत्र होंगे।

प्रमुख विषयगत समूह:
वन एवं पर्यावरण
परंपरा को विज्ञान से जोड़ना
समुदाय-नेतृत्व वाला पारिस्थितिक पुनर्स्थापन एवं पुनर्योजी विकास

उद्घाटन सत्र में प्रो. ननी गोपाल महंत ने कहा, “यह शोध सम्मेलन विकास प्रक्रिया में आवश्यक आदर्श परिवर्तन का प्रतीक है।”नेचरनोमिक्स रिसर्च कॉन्क्लेव 2025 युवाओं को सशक्त बनाने, सामुदायिक ज्ञान के सम्मान और पूर्वी हिमालय के सुदृढ़ भविष्य हेतु एक बहुविषयक अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।

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