नीट-काउंसलिंग विवाद और कानूनी दांव-पेच में अटका परीक्षा परिणाम
विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच गहराया सीधा गतिरोध
नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक गतिरोध में उलझा मेडिकल छात्रों का भविष्य
वंशिका बिष्ट
देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में 2019 से 2022 बैच के बीएएमएस छात्रों का उग्र प्रदर्शन केवल एक तात्कालिक हंगामा नहीं, बल्कि राज्य की आयुष शिक्षा प्रणाली में लंबे समय से गहराई व्यवस्थागत विफलता का नतीजा है। परीक्षा परिणाम घोषित करने और आगे की परीक्षाएं आयोजित कराने की मांग को लेकर प्रशासनिक भवन से लेकर पानी की टंकी तक चढ़कर हुआ यह विरोध प्रदर्शन छात्रों के गहराते आक्रोश और अनिश्चित भविष्य की ओर इशारा करता है। ढाई साल से अधिक समय से परिणाम रुके होने के कारण अभ्यर्थी न तो अपनी शैक्षणिक प्रक्रिया पूरी कर पा रहे हैं और न ही इंटर्नशिप में शामिल होने के योग्य बन पा रहे हैं।
इस गतिरोध की मुख्य वजह निजी कॉलेजों की मनमानी और प्रशासनिक निगरानी का अभाव है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह तर्क कि संबंधित निजी संस्थानों ने बिना नीट और बिना काउंसलिंग के प्रवेश दिए थे, नियम-कायदों के उल्लंघन को उजागर करता है। हालांकि, यहां बड़ा सवाल यह भी उठता है कि जब एडमिशन प्रक्रिया में विसंगतियां थीं, तब शुरुआती दौर में इस पर रोक क्यों नहीं लगाई गई। अब मामला अदालत के विचाराधीन होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन हाथ खड़े कर रहा है, जबकि लाखों रुपये खर्च कर चुके छात्र खुद को प्रशासनिक लापरवाही और कानूनी पचड़ों के बीच ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
प्रशासनिक दांव-पेचों के बीच छात्रों का यह तर्क भी जायज नजर आता है कि संस्थागत गलतियों की सजा अभ्यर्थियों को क्यों दी जा रही है। जब तक न्यायिक प्रक्रिया का कोई सर्वमान्य समाधान नहीं निकलता, तब तक राज्य में चिकित्सा शिक्षा की विश्वसनीयता और सैकड़ों युवाओं का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा।