औली। उत्तराखंड के औली में चल रहे भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों की संयुक्त ट्रेनिंग की। इस दौरान बिल्डिंग क्लियरेंस और रूम इंटरवेंशन ड्रिल के जरिए आमने-सामने की लड़ाई जैसी परिस्थितियों में कार्रवाई का अभ्यास किया गया। ड्रिल में आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित जवानों के तालमेल का प्रदर्शन किया गया।
अभ्यास के दौरान हमला करने वाली टीमों ने भवन में प्रवेश से पहले निगरानी और संभावित खतरे का आकलन किया। इसके बाद कमरे-दर-कमरे कार्रवाई कर परिसर को सुरक्षित करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। इस पूरी ड्रिल में ड्रोन, रोबोटिक डॉग, प्रशिक्षित डॉग स्क्वाड और स्नाइपर टीमों की मदद ली गई। इससे आतंकवाद विरोधी अभियानों में आधुनिक तकनीक के साथ विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों के समन्वित इस्तेमाल को प्रदर्शित किया गया।
अमेरिकी सेना के जवानों ने अभ्यास में शामिल भारतीय सैनिकों से संवाद किया और इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों व तकनीकों का अवलोकन किया। दोनों पक्षों के सैनिकों ने कार्रवाई की प्रक्रियाओं, उपकरणों के इस्तेमाल और अभियान के दौरान आपसी समन्वय को समझने का प्रयास किया। अमेरिकी सेना के अनुसार इस तरह की ड्रिल का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच रणनीति, तकनीक और संचालन संबंधी प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाना है।
‘युद्ध अभ्यास-2026’ भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण का 22वां संस्करण है। इसका उद्घाटन 15 सितंबर को औली में हुआ था। अभ्यास में दोनों देशों के करीब 600-600 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इस बार पर्वतीय और अर्द्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त अभियान, पैदल सेना की कार्रवाई, ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों के इस्तेमाल तथा आपसी संचालन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
औली में हुई आतंकवाद विरोधी ड्रिल ने यह भी दिखाया कि आधुनिक सैन्य अभियानों में मानव संसाधन और तकनीक का समन्वय किस तरह महत्वपूर्ण होता जा रहा है। संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान, सामरिक समझ और एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करने का अवसर मिला है।