संसद के मानसून सत्र में नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा बुधवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख कारण बना रहा। सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह इस मामले पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि विपक्ष ने नियम 267 के तहत बहस कराने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। नियम और प्रक्रिया को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार प्रभावित होती रही।
राज्यसभा में दो बार स्थगन के बाद दोपहर दो बजे कार्यवाही शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को सरकार का पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया। हालांकि, उनके बोलना शुरू करते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर रिजिजू ने कहा कि सरकार विपक्ष की मांग के अनुरूप चर्चा के लिए “सौ प्रतिशत तैयार” है, लेकिन कांग्रेस बहाने बनाकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है और चर्चा से बच रही है।
रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र की शुरुआत से ही सरकार ने साफ कर दिया था कि नीट पेपर लीक समेत सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं को पहले ही जानकारी दी जा चुकी है। उनके अनुसार, चर्चा किस नियम के तहत होगी और उसकी अवधि कितनी होगी, इसका निर्णय सदन के अध्यक्ष या सभापति के अधिकार क्षेत्र में आता है।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग पर जोर देते हुए कहा कि देशभर में छात्रों और अभिभावकों के विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए इस मामले को दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने भी इस मांग का समर्थन किया।
लोकसभा में कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। सरकार ने दोहराया कि वह युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सार्थक बहस चाहती है, लेकिन प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से संसद का गतिरोध जारी रहा।