यमुना में हजारों मछलियों की मौत, आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?

कानपुर देहात में यमुना नदी के करीब पांच किलोमीटर लंबे हिस्से में हजारों मछलियों के मृत मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। नयापुरवा से मनकी पक्के घाट और क्योटरा तक नदी किनारे बड़ी संख्या में मृत मछलियां दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मछलियों की मौत नहीं देखी। कुछ मछलियां पानी में तड़पती हुई भी नजर आईं, जिससे घटना की गंभीरता और बढ़ गई।

घटना के बाद कुछ ग्रामीण मृत मछलियों को अपने घर भी ले गए, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे बेहद खतरनाक बताते हुए ऐसी मछलियों का सेवन न करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि मछलियां प्रदूषित या रसायनयुक्त पानी के कारण मरी हैं, तो उनका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है और विषाक्तता जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ऊपरी क्षेत्रों से प्रदूषित या रसायनयुक्त पानी आने और नदी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) का स्तर बढ़ने के कारण यह स्थिति बनी है। जिला कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) रमाकांत निरंजन के अनुसार, बीओडी बढ़ने से पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हो सकती है।

वहीं, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी मनोज चौरसिया ने बताया कि बारिश के दौरान नदी में सिल्ट और विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट बहकर आ जाते हैं, जिससे जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के आसपास कोई औद्योगिक इकाई नहीं है, इसलिए प्रदूषण का स्रोत संभवतः नदी के ऊपरी हिस्से हैं। कम जलस्तर और पानी के ठहराव ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया होगा।

प्रशासन ने नदी के पानी के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। इस बीच ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने, पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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