शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन पुलिस कार्रवाई के बाद भी जारी है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प तथा लाठीचार्ज के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आंदोलन का मंच क्षतिग्रस्त कर दिया और बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र देर शाम दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे और पूरी रात धरने पर डटे रहे।
लाठीचार्ज में घायल कई छात्रों को उपचार के लिए राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद कई छात्र वापस आंदोलन स्थल पर लौट आए और अपने साथियों के साथ फिर से प्रदर्शन में शामिल हो गए। छात्रों का आरोप है कि उन्हें हटाने के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्रों के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। वहीं पुलिस की ओर से भी कुछ कर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर बना मंच भी क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि प्रशासन प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह हटाने में सफल नहीं हो सका। शाम होते-होते आंदोलन स्थल पर छात्रों की संख्या फिर बढ़ने लगी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने केरल भवन के पास बैरिकेडिंग कर आवाजाही सीमित कर दी, लेकिन रात होते-होते बड़ी संख्या में छात्र फिर से जंतर-मंतर पहुंच गए।
रात करीब 10 बजे तेज बारिश और बिजली गुल होने से प्रदर्शनकारियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। इसके बावजूद छात्रों ने हिम्मत नहीं हारी। अंधेरे में उन्होंने अपने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर नारेबाजी जारी रखी और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते रहे। छात्र नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों, जिनमें अभिजीत दीपके समेत अन्य प्रतिनिधि शामिल थे, ने पूरी रात आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाया और संघर्ष जारी रखने की अपील की।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। जंतर-मंतर पर देर रात तक छात्रों की मौजूदगी ने उनके आंदोलन के प्रति दृढ़ संकल्प को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया।