गलवान के बाद बदला रुख! चीन की 4 कंपनियों को भारत सरकार ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली। भारत-चीन सीमा विवाद और गलवान संघर्ष के बाद चीनी कंपनियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच केंद्र सरकार ने बिजली क्षेत्र से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भारत में विनिर्माण इकाइयां संचालित करने वाली चार चीनी बिजली उपकरण कंपनियों को महत्वपूर्ण सरकारी बिजली परियोजनाओं के टेंडर में भाग लेने की विशेष अनुमति दी है। यह छूट सीमित अवधि के लिए दी गई है और इसे सामान्य नियम नहीं माना जाएगा।

सरकार से विशेष अनुमति पाने वाली कंपनियों में TBEA Energy, Nanjing Electric India, New Northeast Electric India और Taikai Electric India शामिल हैं। इन कंपनियों को सार्वजनिक खरीद नियमों के उन प्रावधानों से छूट दी गई है, जिनके तहत भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों के लिए सरकारी टेंडर में भाग लेने से पहले भारतीय प्राधिकरण से विशेष पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 24 जून को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल दो वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस निर्णय को भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने जनवरी 2026 में उन कंपनियों को राहत देने की सिफारिश की थी, जिन्होंने भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित कर रखी हैं। मंत्रालय का मानना था कि बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए इस तरह की सीमित छूट आवश्यक है।

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद सरकार ने चीनी कंपनियों पर कई प्रतिबंध लगाए थे। इसके तहत सरकारी परियोजनाओं में भागीदारी के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से सुरक्षा एवं राजनीतिक मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी। इसके अलावा संशोधित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति और प्रेस नोट-3 के तहत सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश के लिए भी सरकार की पूर्व स्वीकृति जरूरी कर दी गई थी।

विशेष अनुमति प्राप्त चारों कंपनियां ट्रांसफार्मर, हाई-वोल्टेज स्विचगियर, गैस-इंसुलेटेड स्विचगियर और ट्रांसमिशन लाइनों में उपयोग होने वाले अन्य महत्वपूर्ण बिजली उपकरणों का निर्माण भारत में ही करती हैं। इनमें से न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया देश की कई प्रमुख ट्रांसमिशन परियोजनाओं में भी काम कर रही है। सरकार का यह फैसला देश के बिजली बुनियादी ढांचे की गति बनाए रखने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

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