भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने गाजा पट्टी में लगातार बिगड़ते मानवीय हालात पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग पूरी तरह से चरमरा चुकी है, आवश्यक दवाओं का गंभीर अभाव है और करीब 11 हजार सर्जरी टालनी पड़ी हैं। उन्होंने भारत से गाजा के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता बढ़ाने की अपील भी की।
राजदूत के अनुसार, करीब 365 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले गाजा में लगभग 23 लाख लोग रहते हैं, लेकिन लगातार संघर्ष के कारण इस इलाके का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा तबाह हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है और नागरिकों का जीवन लगातार संकट में है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गाजा के बच्चों का बचपन संकट की भेंट चढ़ गया है। लगातार तीसरे वर्ष भी अधिकांश बच्चे स्कूल नहीं जा सके हैं और पिछले दो वर्षों से उनकी नियमित पढ़ाई पूरी तरह ठप है। इसका असर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राजदूत ने कहा कि अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं और जरूरी चिकित्सा सामग्री की भारी कमी है। गंभीर रूप से घायल हजारों मरीजों को बेहतर इलाज के लिए गाजा से बाहर भेजे जाने की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं मिल रही है। ऐसे में अनेक मरीजों की जान जोखिम में बनी हुई है।
अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने इस कठिन समय में भारत द्वारा दिए जा रहे सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हाल ही में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए कार्य करने वाली यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी को अपनी वार्षिक वित्तीय सहायता दोबारा शुरू की है। इसके अलावा भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र और विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी दवाइयों और अन्य जरूरी चिकित्सा सहायता के लिए सहयोग का भरोसा मिला है। उन्होंने कहा कि यह मानवीय सहयोग गाजा के लाखों लोगों के लिए राहत की महत्वपूर्ण उम्मीद बनकर सामने आया है।