रुड़की। Ramadan के पवित्र महीने में चौथे जुमा की नमाज नगर और आसपास के क्षेत्रों में अकीदत और श्रद्धा के साथ अदा की गई। नमाज के दौरान रोजेदारों ने देश की खुशहाली, अमन-सलामती और आपसी भाईचारे के लिए दुआ मांगी।
नगर की प्रमुख Jama Masjid Roorkee में बड़ी संख्या में नमाजी एकत्र हुए। यहां जुमा की नमाज Mufti Mohammad Saleem ने अदा कराई। नमाज से पूर्व मदरसा रहमानिया के प्रधानाचार्य Maulana Azhar Ul Haq ने तकरीर करते हुए रमजान के आखिरी अशरे की अहमियत पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि रमजान का पहला अशरा रहमतों का और दूसरा अशरा मगफिरत का माना जाता है, जबकि तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात पाने का होता है। ऐसे में मुसलमानों को चाहिए कि इस समय में इबादत, रोजा और नमाज की पाबंदी को और बढ़ाएं तथा अल्लाह की रहमतों का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि यह अशरा गफलत में गुजर गया तो यह रोजेदारों के लिए बड़ी मेहरूमी होगी।
मौलाना ने यह भी कहा कि कई लोग रोजा तो रखते हैं, लेकिन नमाज की पाबंदी या अन्य बुरी आदतों से बचने में लापरवाही बरतते हैं। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करें और अपने आचरण को बेहतर बनाएं। उन्होंने रोजेदारों से अपील की कि रमजान के बचे हुए दिनों की कदर करते हुए इबादत और नेक कामों में अधिक समय दें।
इस दौरान उन्होंने ईद से पहले सदका-ए-फित्र और जकात अदा करने की भी अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास जरूरत से अधिक धन-दौलत है, उन्हें Eid al-Fitr की नमाज से पहले सदका-ए-फित्र जरूर अदा करना चाहिए, जबकि जकात साल भर में कभी भी दी जा सकती है।
नमाज के बाद रोजेदारों ने मुल्क की तरक्की, शांति और भाईचारे के लिए सामूहिक दुआ की। इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में रोजेदार मौजूद रहे।