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ज्ञान के साथ चरित्र भी मजबूत बनाएं युवा, राज्यपाल ने बताया विकसित भारत का मंत्र

देहरादून। राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने कहा कि युवाओं के जीवन में शिक्षा और ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार, मजबूत चरित्र और सकारात्मक सोच का होना भी बेहद जरूरी है। केवल ज्ञान हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करना भी युवाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से जीवन में सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।

राज्यपाल शुक्रवार को लोक भवन में ‘युवा संगम’ कार्यक्रम के तहत पश्चिम बंगाल से उत्तराखंड पहुंचे विद्यार्थियों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि युवा संगम महज एक यात्रा नहीं, बल्कि देश को जानने, समझने और उसकी सांस्कृतिक विविधता को करीब से अनुभव करने का अवसर है। ऐसे कार्यक्रम विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच आपसी समझ, आत्मीयता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ देश की सांस्कृतिक विविधता को एकता के सूत्र में बांधने की महत्वपूर्ण पहल है। जब विद्यार्थी दूसरे राज्यों में जाकर वहां की भाषा, खान-पान, परंपराओं और संस्कृति को समझते हैं, तो उन्हें भारत की विविधता का वास्तविक अनुभव होता है। इससे राष्ट्रीय एकता की भावना और मजबूत होती है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को अच्छे संस्कार अपनाने, अनुशासित रहने और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी रास्ता भटक जाना भी सीखने और खुद को समझने का अवसर हो सकता है, लेकिन जरूरी है कि व्यक्ति अपनी गलतियों से सीख लेकर सही दिशा में लौटे और अपने चरित्र को मजबूत बनाए।

उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों, पर्यावरण संरक्षण और समाज के वंचित वर्गों की समस्याओं के समाधान में करने की अपील की। राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। इसके लिए उनका ज्ञानवान होने के साथ चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित होना भी आवश्यक है।

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