परियोजना के पूरा होने के बाद प्रतिवर्ष लगभग 298.51 मिलियन यूनिट यानी 29.85 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। इससे प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी होने के साथ ही ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परियोजना को अंतिम वन स्वीकृति मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल विद्युत उत्पादन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य सरकार पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखते हुए इन संभावनाओं का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। त्यूणी-प्लासू जल विद्युत परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता मजबूत होगी। साथ ही राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को भी नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़ी आवश्यक स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। प्रदेश के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
त्यूणी-प्लासू परियोजना को मिली अंतिम वन स्वीकृति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
