मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार, पहले की व्यवस्था में सड़क निर्माण के स्टेज-1 यानी पहाड़ कटान का कार्य पूरा होने के बाद स्टेज-2 के कार्यों की स्वीकृति भी नई सड़कों की तरह संबंधित विधायकों की प्राथमिकता पर निर्भर करती थी। इस कारण कई सड़कों पर पहाड़ कटान का काम पूरा होने के बावजूद आगे का निर्माण लंबे समय तक अटका रहता था।
बरसात में सड़कें बाधित होने की समस्या होगी कम
स्टेज-2 के कार्य समय पर नहीं होने से कई स्थानों पर सड़कों का निर्माण अधूरा रह जाता था। नालियों, पुलियों, सुरक्षा दीवारों, ढाल संरक्षण और सड़क की सतह का निर्माण नहीं होने के कारण बारिश के दौरान मलबा आने, पानी जमा होने और सड़क क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याएं सामने आती थीं। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात बाधित होता था और स्थानीय निवासियों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत स्टेज-1 और स्टेज-2 के कार्यों को एक साथ स्वीकृत करने की व्यवस्था की जाएगी। स्टेज-1 में पहाड़ कटान और डम्पिंग जोन से संबंधित कार्य शामिल हैं, जबकि स्टेज-2 के अंतर्गत सुरक्षा दीवारों, पुलियों और अन्य आवश्यक निर्माण कार्यों को पूरा किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य सड़क निर्माण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और अधूरे कार्यों के कारण होने वाली परेशानियों को कम करना है। पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित और सुचारु यातायात के लिए सड़क के साथ जल निकासी, ढलान सुरक्षा और अन्य जरूरी संरचनाओं का निर्माण भी महत्वपूर्ण है।
नई व्यवस्था से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण कार्यों को प्राथमिकता मिलने और अधूरी सड़कों को पूरा करने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
