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बदरी-केदार मंदिर समिति के अस्थायी कर्मचारियों को राहत की उम्मीद, 3 सप्ताह में समाधान का भरोसा

ऋषिकेश/गोपेश्वर/रुद्रप्रयाग/देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रबंधन ने सकारात्मक पहल की है। वन टाइम सेटलमेंट, समान कार्य के लिए समान वेतन और सम्मानजनक मानदेय जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप कार्यालय के सभागार में बैठक आयोजित की गई। इसमें बीकेटीसी संयुक्त कर्मचारी संघ और अस्थायी कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। मांगों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया। बीकेटीसी की ओर से कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अगले तीन सप्ताह के भीतर प्रयास किए जाएंगे।

वन टाइम सेटलमेंट और समान वेतन पर चर्चा

बैठक का मुख्य उद्देश्य मंदिर समिति में लंबे समय से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों की मांगों पर विचार करना और उनके समाधान का रास्ता निकालना रहा। कर्मचारियों की ओर से वन टाइम सेटलमेंट, समान कार्य-समान वेतन तथा सम्मानजनक वेतन की मांग उठाई गई। इन मुद्दों पर चर्चा के बाद उपसमिति के गठन को समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि संबंधित मुद्दों पर विचार कर उचित समाधान निकाला जा सके।

धरना समाप्त करने की अध्यक्ष ने की अपील

बैठक के दौरान हेमंत द्विवेदी ने श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ मंदिर समिति के अस्थायी कर्मचारियों से धरना समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालने में सहयोग करने का आग्रह किया।

उपसमिति के गठन और तीन सप्ताह में समाधान के आश्वासन के बाद अब कर्मचारियों की मांगों पर होने वाली आगामी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। वन टाइम सेटलमेंट और समान कार्य-समान वेतन जैसे विषयों पर अंतिम निर्णय के बाद ही कर्मचारियों को मिलने वाली वास्तविक राहत की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, बीकेटीसी प्रबंधन की इस पहल से कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

 

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