रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शनिवार को रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए। उनकी ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री पूर्वनिर्धारित संवैधानिक दायित्वों में व्यस्त हैं। दलील सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की है। अदालत ने सोरेन को उस दिन शाम चार बजे व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है।
यह घटनाक्रम झारखंड हाईकोर्ट द्वारा सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के बाद सामने आया है। हाईकोर्ट ने रांची की विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें उनकी डिस्चार्ज याचिका अस्वीकार कर दी गई थी। इसके बाद निचली अदालत में मामले की आगे की कार्यवाही का रास्ता साफ हो गया।
मामला रांची के बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ जमीन से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस जमीन को कथित तौर पर अवैध तरीके से हासिल करने और उससे जुड़े लेनदेन की जांच कर रहा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि जमीन के दस्तावेजों और संबंधित प्रक्रियाओं में फर्जीवाड़ा किया गया।
सोरेन की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। उनकी ओर से कहा गया है कि मामले में उनके खिलाफ पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं।
विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून को सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों पर आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त है। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर दोषसिद्धि का कोई निष्कर्ष नहीं दिया था। ईडी ने मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। अब 21 सितंबर की सुनवाई पर अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।