आपदा से पहले तैयारी पर जोर, हर जिले में बनेंगे 10 मास्टर ट्रेनर

देहरादून। उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के सहयोग से प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। इसके तहत राज्य से लेकर जिला स्तर तक अधिकारियों, कर्मचारियों और विभिन्न विभागों से जुड़े कार्मिकों को आपदा प्रबंधन, जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, खोज एवं बचाव तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण को नियमित और चरणबद्ध तरीके से संचालित करने के लिए वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर भी तैयार किया जाएगा।

एनआईडीएम के कार्यकारी निदेशक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मधूप व्यास ने शनिवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में चल रही प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास गतिविधियों की जानकारी ली। साथ ही आगामी वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर को लेकर चर्चा की। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए की गतिविधियों से उन्हें अवगत कराया।

मधूप व्यास ने कहा कि उत्तराखंड भौगोलिक और प्राकृतिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। यहां भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि, बादल फटना, हिमस्खलन और वनाग्नि जैसी आपदाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया के साथ उससे पहले की तैयारियों को मजबूत करना भी जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षण और क्षमता विकास को निरंतर जारी रखना होगा।

एनआईडीएम के सहयोग से पहले चरण में प्रत्येक जिले में 10 मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। इन्हें आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बाद में ये मास्टर ट्रेनर अपने जिलों में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षण देंगे। राज्य स्तर पर भी मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षित समूह बनाया जाएगा, जो जिला स्तर के प्रशिक्षकों को मार्गदर्शन देगा।

इसके अलावा आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे। विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आपदा की स्थिति में विभागों के बीच बेहतर समन्वय कायम हो सके।

बैठक में प्रशिक्षण के साथ मॉक ड्रिल, अभ्यास और व्यावहारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि वास्तविक आपदा की स्थिति में प्रशिक्षित कार्मिक तेजी से और प्रभावी तरीके से राहत एवं बचाव कार्य संचालित कर सकें।

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