53.93 लाख साइबर शिकायतें, FIR सिर्फ 1.30 लाख मामलों में

 नई दिल्ली। देश में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों और दर्ज होने वाली एफआईआर के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। राज्यसभा की गृह मामलों से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच छह वर्षों में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 53.93 लाख शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से केवल करीब 1.30 लाख मामलों में ही एफआईआर दर्ज की गई। समिति ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए अपराध के आंकड़ों और कानून-व्यवस्था से जुड़े दावों पर सवाल उठाए हैं।

31 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के बाद भी कई मामलों में पुलिस स्तर पर फॉलो-अप में देरी होती है। समिति ने शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर निगरानी की जरूरत बताई है।

समिति के मुताबिक कुछ मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाय गैर-संज्ञेय रिपोर्ट तक सीमित रह जाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे अपराध की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पाती और गंभीर मामलों के आंकड़े भी प्रभावित हो सकते हैं। समिति ने राज्यों द्वारा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को आंकड़े भेजने में होने वाली देरी का भी मुद्दा उठाया। रिपोर्ट के अनुसार यह देरी कई बार डेढ़ से दो वर्ष तक हो जाती है। इससे अपराध नियंत्रण की योजनाएं, सुरक्षा नीति और पुलिस बजट पुराने आंकड़ों पर आधारित होने का जोखिम रहता है।

रिपोर्ट में एनसीआरबी के ‘प्रिंसिपल ऑफेंस रूल’ को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके तहत एक ही घटना में कई अपराध होने पर आंकड़ों में मुख्य अपराध को प्राथमिकता दी जाती है और अन्य अपराधों को अलग से दर्ज नहीं किया जा सकता। उदाहरण के तौर पर किसी महिला के अपहरण के साथ लूट और आपत्तिजनक वीडियो ऑनलाइन प्रसारित करने जैसी घटनाओं में मुख्य अपराध के रूप में केवल अपहरण दर्ज होने की स्थिति में अन्य अपराधों का पूरा आंकड़ा सामने नहीं आ सकता।

समिति ने अपराध के आंकड़ों को अधिक व्यापक और वास्तविक बनाने की जरूरत पर जोर दिया है, ताकि पुलिसिंग और सुरक्षा व्यवस्था की योजनाएं सही जानकारी के आधार पर तैयार की जा सकें।

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