नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूह के सहयोग को सरकारों तक सीमित रखने के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को दोस्ती, साझेदारी और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ाते हुए इसमें आम लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स के मंच पर सरकारों के बीच सहयोग के साथ-साथ उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जाना चाहिए। व्यापक जनभागीदारी से समूह के सहयोग को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाया जा सकता है। उनका संदेश स्पष्ट था कि ब्रिक्स का दायरा केवल सरकारी स्तर की बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को भी इसका भागीदार बनाया जाना चाहिए।
इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल नेताओं, विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के सम्मान में विशेष डिनर का आयोजन किया। हालांकि, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस डिनर में शामिल नहीं हुए। मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, शिखर सम्मेलन के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद शी जिनपिंग आराम करने के लिए होटल लौट गए थे। उनके डिनर में शामिल नहीं होने की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद भी डिनर में शामिल नहीं हुए। वह दिन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट गए थे।
गौरतलब है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी की। करीब सात साल बाद हुई उनकी भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अहम माना गया। सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन सुना और अन्य नेताओं के साथ फैमिली फोटो में भी हिस्सा लिया। इसके बाद शिखर सम्मेलन के कार्यक्रम पूरे कर वह चीन के लिए रवाना हो गए।