देहरादून। उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की जमीन को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इन्वेस्टर समिट के बाद सरकारी जमीन को निवेशकों के लिए उपलब्ध कराने के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां करीब 7000 बीघा जमीन को 90 साल की लीज पर देने का आरोप लगा रही है, वहीं सरकार और भाजपा का कहना है कि निवेश प्रस्तावों के लिए केवल 45 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की सरकारी जमीन को लंबे समय की लीज पर निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। उनका दावा है कि यूआईआईडीबी की आड़ में लैंड बैंक तैयार किया गया है और अब उसे पूंजीपतियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। गोदियाल ने सरकार से 90 साल की लीज और जमीन आवंटन की प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस के आरोपों के बाद सरकार की ओर से सफाई दी गई। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि 7000 बीघा का आंकड़ा भ्रामक है। उनके अनुसार निवेश प्रस्तावों के लिए करीब 45 एकड़ जमीन ही चिन्हित की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन को 90 साल की लीज पर देने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है और उद्योगों के लिए निर्धारित जमीन के अलावा कोई अतिरिक्त जमीन नहीं दी जा रही है। उन्होंने कांग्रेस से 7000 बीघा के दावे का आधार बताने को कहा।
हालांकि, जमीन के वास्तविक आंकड़े और आवंटन की शर्तों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस लगातार सरकार से दस्तावेज सार्वजनिक करने और स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रही है। ऐसे में यूआईआईडीबी के लैंड बैंक, प्रस्तावित निवेश और जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है। विवाद पर अंतिम तस्वीर सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी या आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही साफ होगी।