नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता जताई है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन स्वीकार की गई ‘नई दिल्ली घोषणा’ में संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों सहित सभी स्थानों पर सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने और सांस्कृतिक संपत्तियों की अवैध तस्करी रोकने पर जोर दिया गया।
ब्रिक्स नेताओं ने कहा कि पुरावशेषों के साथ आध्यात्मिक, पैतृक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाली वस्तुओं को उनके मूल देशों में वापस किया जाना चाहिए। इससे संबंधित देशों और समुदायों की ऐतिहासिक पहचान तथा विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
घोषणा में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की 11वीं बैठक में स्वीकार की गई भोपाल घोषणा का भी स्वागत किया गया। नेताओं ने माना कि संस्कृति लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और ब्रिक्स सदस्य देशों के रिश्तों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले दिन की चर्चा के समापन पर नई दिल्ली घोषणा को अपनाए जाने की जानकारी दी। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, अबू धाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सहित अन्य नेता मौजूद रहे।
ब्रिक्स देशों ने संग्रहालयों, अभिलेखागार, पुस्तकालयों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों के बीच दस्तावेजों एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई। सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों में श्रेष्ठ तौर-तरीकों को साझा करने के साथ कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया गया।
घोषणा में यूनेस्को के संबंधित कार्यक्रमों के तहत स्वैच्छिक संयुक्त बहुराष्ट्रीय नामांकन की संभावनाएं तलाशने की बात कही गई। साथ ही सांस्कृतिक उद्योगों के विकास के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया। सदस्य देशों ने ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव और ‘वेव्स बाजार’ के आयोजन का भी स्वागत किया।
वहीं, ब्रिक्स के दो दशक पूरे होने पर 12 सितंबर को भारत मंडपम में दो स्मारक डाक टिकट जारी किए गए। इनमें ब्रिक्स की एकजुटता और भारत की ‘मानवता सबसे पहले’ तथा ‘जन-केंद्रित’ सोच को दर्शाया गया।