नई दिल्ली। PM मोदी ने कहा कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि इस मंच पर उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभवों का सम्मान होता है और समाधान उनके लिए नहीं, बल्कि उन्हें साथ लेकर तैयार किए जाते हैं। उन्होंने तकनीक और दुर्लभ खनिजों के इस्तेमाल को दबाव या हथियार के रूप में किए जाने पर चिंता जताते हुए इनके विकास और उपयोग को अधिक समावेशी बनाने पर जोर दिया।
भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स शिखर वार्ता के ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ सत्र में स्वागत भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और सहयोग में है। उन्होंने कहा कि विविधता पहचान, सहयोग प्रेरणा और प्रगति का लाभ पूरी मानवता तक पहुंचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में महामारी, जलवायु आपदाओं और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियों ने स्पष्ट किया है कि किसी एक क्षेत्र का संकट अब सीमित नहीं रहता। इसी को देखते हुए ब्रिक्स में लचीलापन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम और आपदा प्रबंधन के लिए प्रारंभिक चेतावनी डेटा एकीकरण संबंधी दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं।
मोदी ने बताया कि ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क से वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक भरोसेमंद और लचीला बनाने में मदद मिलेगी। वहीं, ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क के जरिए स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स को जोड़ने तथा स्टार्टअप इनोवेशन फंड के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने की पहल की गई है।
उन्होंने डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर भी जोर दिया। एमएसएमई सहयोग पोर्टल, अर्बन मोबिलिटी हब और डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में विकसित समाधानों का लाभ ग्लोबल साउथ तक पहुंचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीकी समाधान स्थानीय जरूरतों के अनुरूप, किफायती और आसानी से अपनाने योग्य होने चाहिए। साथ ही विकास और पर्यावरण को एक-दूसरे का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक मानते हुए संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।