नई दिल्ली। कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं किए जाने और परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार देश के सामने मौजूद महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दों पर अनावश्यक गोपनीयता बरत रही है, जबकि ऐसे विषयों पर व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी है।
जयराम रमेश ने कहा कि विपक्षी दल मार्च से ही परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय गणराज्य की बुनियाद से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर सरकार आखिर इतनी गोपनीयता क्यों बरत रही है।
कांग्रेस नेता ने मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसके बावजूद सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। रमेश के मुताबिक, सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने और सत्रावसान के बीच का अंतर अब 29 दिन तक पहुंच गया है, जबकि सामान्य तौर पर यह अवधि तीन-चार दिन की होती है।
रमेश ने आशंका जताई कि सरकार इस देरी का इस्तेमाल विपक्ष पर दबाव बनाने के लिए ‘माइंड गेम’ और मनोवैज्ञानिक अभियान के तौर पर कर रही है।
कांग्रेस महासचिव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए दावा किया कि 17 अप्रैल को लोकसभा में मिली हार से वह आहत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है।
रमेश ने कहा कि पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद सरकार दिखावे, दबाव, धमकी और प्रलोभन के जरिए विपक्षी दलों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने केंद्र की इस रणनीति को ‘मूर्खतापूर्ण’ करार दिया।