दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने और व्यावसायिक वाहनों को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े के अनुसार, दिल्ली में हल्के मालवाहक वाहनों की खरीद में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में दिल्ली में कुल 14,712 नए हल्के मालवाहक वाहन यानी एन-1 श्रेणी के वाहन बेचे गए। इनमें 1,026 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल थे। इस तरह कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब सात प्रतिशत रही। वहीं, इस श्रेणी में सीएनजी वाहनों की बिक्री सबसे अधिक रही। वर्ष 2025 में कुल 13,646 सीएनजी हल्के मालवाहक वाहन खरीदे गए।
इसके मुकाबले डीजल और पेट्रोल वाहनों की बिक्री बेहद कम रही। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान केवल 35 डीजल और चार पेट्रोल हल्के मालवाहक वाहन ही बिके। इससे संकेत मिलता है कि दिल्ली के व्यावसायिक परिवहन क्षेत्र में पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों के मुकाबले स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक विकल्पों की ओर धीरे-धीरे रुझान बढ़ रहा है।
सीएक्यूएम के अनुसार, दिल्ली में एन-1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों की कुल संख्या अब करीब 1.06 लाख पहुंच गई है। इनमें लगभग 1.03 लाख वाहन सीएनजी से संचालित हैं, जबकि करीब 1,980 वाहन इलेक्ट्रिक हैं।
राजधानी में माल ढुलाई और छोटे व्यावसायिक परिवहन में इन वाहनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ना वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों से सीधे तौर पर टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता, जिससे शहर के प्रदूषण भार को कम करने में मदद मिल सकती है।
सीएक्यूएम का जोर व्यावसायिक वाहनों को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने पर है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलने से मालवाहक वाहनों के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।