आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का असर भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के नौकरी बाजार पर तेजी से दिखाई देने लगा है। नियमित और दोहराव वाले कामों से जुड़ी पारंपरिक भूमिकाओं की मांग में कमी आई है, जबकि विशेषज्ञता और तकनीकी दक्षता वाले पदों की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में GCC में नौकरियों का स्वरूप तेजी से बदल सकता है।
क्वेस कॉर्प की रिपोर्ट ‘GCC 2.0: द राइज ऑफ डिजिटल बिजनेस फंक्शन्स’ के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में प्रोक्योरमेंट यानी खरीद से जुड़ी भूमिकाओं की मांग में सबसे अधिक 41.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद एनालिटिक्स से जुड़े पदों की मांग 37.9 प्रतिशत, ग्राहक सेवा की मांग 34.5 प्रतिशत और वित्त एवं जोखिम प्रबंधन से जुड़े अवसरों में 32.8 प्रतिशत की कमी आई।
रिपोर्ट में इस बदलाव के पीछे ऑटोमेशन, काम के केंद्रीकरण और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया गया है। कंपनियां अब ऐसे कई नियमित कार्यों को तकनीक के माध्यम से पूरा कर रही हैं, जिनके लिए पहले बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी।
प्रोक्योरमेंट के क्षेत्र में लेनदेन से जुड़ी गतिविधियां तेजी से स्वचालित हो रही हैं और कंपनियां रणनीतिक सोर्सिंग की ओर बढ़ रही हैं। इसी तरह ग्राहक सेवा के क्षेत्र में भी ऑटोमेशन और सेल्फ-सर्विस विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे सामान्य स्तर की नौकरियों की जरूरत कम हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक GCC अब पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़कर डोमेन आधारित इंटेलिजेंस और AI-सक्षम एनालिटिक्स पर अधिक जोर दे रहे हैं। इसका असर सामान्य एनालिटिक्स भूमिकाओं पर भी पड़ा है। कंपनियों को अब ऐसे कर्मचारियों की जरूरत अधिक है, जो AI, डिजिटल तकनीक, डेटा और संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखते हों।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव रोजगार के लिए चुनौती के साथ नए अवसर भी पैदा कर रहा है। नियमित कार्यों पर निर्भर कर्मचारियों के लिए कौशल उन्नयन जरूरी होगा। वहीं AI, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल बिजनेस से जुड़ी क्षमताओं वाले पेशेवरों की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है।
