पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल इलाके में करीब 100 से 125 साल पुराने एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर के क्षतिग्रस्त होने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक विवाद गहरा गया है। मंदिर को गिराए जाने की खबर सामने आने के बाद भारत ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। वहीं, पाकिस्तान ने मंदिर को जानबूझकर गिराए जाने के आरोपों को खारिज कर दिया है।
स्थानीय लोगों और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़े संगठनों का दावा है कि नरोवाल के सिराज गांव में स्थित मंदिर को धार्मिक कट्टरपंथियों के एक समूह ने कथित तौर पर निशाना बनाया। आरोप लगाया गया है कि मंदिर की जमीन पर कब्जा करने और पास स्थित एक मदरसे का विस्तार करने के उद्देश्य से इसे गिराया गया।
हालांकि, पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान के अनुसार, मंदिर को किसी समूह ने जानबूझकर नष्ट नहीं किया। उनका कहना है कि 21 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के कारण मंदिर की इमारत क्षतिग्रस्त हुई थी। पाकिस्तानी पक्ष के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों ने नुकसान का सर्वेक्षण किया है और मंदिर की बहाली के लिए जरूरी कदम शुरू कर दिए गए हैं।
भारत ने पाकिस्तान के इस दावे के बीच मंदिर की स्थिति पर चिंता जताई। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 2 सितंबर को घटना की निंदा करते हुए कहा कि एक सदी पुराने धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की कथित उदासीनता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
भारत ने पाकिस्तान से ऐतिहासिक मंदिर के संरक्षण और बहाली के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। साथ ही, नई दिल्ली ने जोर दिया कि पाकिस्तान सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने सभी अल्पसंख्यक नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा सुनिश्चित करे।
फिलहाल दोनों देशों के दावों में स्पष्ट अंतर है। भारत जहां मंदिर की सुरक्षा और संभावित तोड़फोड़ को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं पाकिस्तान इसे बारिश से हुआ नुकसान बता रहा है। इस विवाद ने एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।