चेन्नई। तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित देवराजस्वामी अथि वरदराज मंदिर में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लागू होने के बाद मंदिर का नजारा बदलता नजर आ रहा है। जहां पहले बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु सेल्फी लेते और तस्वीरें-वीडियो बनाते दिखाई देते थे, वहीं अब मंदिर परिसर में बुजुर्ग और मध्य आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की मौजूदगी अधिक नजर आ रही है। मंदिर में प्रवेश से पहले मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था के कारण युवाओं की संख्या में कमी आने की चर्चा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर प्रशासन ने माना है कि मोबाइल बैन लागू होने के बाद रोजाना श्रद्धालुओं की संख्या में करीब 20 प्रतिशत तक कमी आई है। सबसे अधिक असर युवा वर्ग पर दिखाई दे रहा है। पहले कई युवा दर्शन के साथ मंदिर की तस्वीरें लेने, वीडियो बनाने और सोशल मीडिया के लिए कंटेंट तैयार करने के उद्देश्य से भी पहुंचते थे। मोबाइल पर रोक लगने के बाद ऐसे श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई है।
मंदिर प्रशासन ने प्रवेश से पहले स्मार्टफोन जमा कराने के लिए काउंटर बनाए हैं। प्रत्येक मोबाइल फोन जमा करने के लिए पांच रुपये शुल्क लिया जा रहा है। प्रतिबंध लागू होने के शुरुआती दिन इन काउंटरों पर लंबी कतारें देखी गईं, लेकिन अब यहां भी मध्य आयु और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है।
यह बदलाव केवल देवराजस्वामी मंदिर तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। तमिलनाडु के कई प्रमुख मंदिरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लागू होने के बाद इसी तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राज्य के 52 बड़े मंदिरों में 1 सितंबर से मोबाइल फोन प्रतिबंधित किया गया है।
देवराजस्वामी मंदिर के कार्यकारी अधिकारी ने श्रद्धालुओं की संख्या में कमी की बात स्वीकार करते हुए फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मंदिर की पवित्रता को सोशल मीडिया कंटेंट के लिए कम नहीं किया जा सकता।
दरअसल, यह प्रतिबंध मद्रास हाईकोर्ट के दिसंबर 2022 के निर्देश के तहत लागू किया गया है। तिरुचेंदूर सुब्रमणिया स्वामी मंदिर में स्मार्टफोन के दुरुपयोग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने मंदिरों में मोबाइल के इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्देश दिया था।