वाशिंगटन/ईरान, 25 अक्टूबर। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका फिर गहरा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनका प्रशासन ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान पर विचार कर सकता है। वहीं, अंतरिम समझौते को लेकर चल रही बातचीत में रुकावट के लिए ईरान ने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने कई देशों में अपने राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों की संख्या घटाने की प्रक्रिया भी शुरू की है।
अल जजीरा और एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के सामने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने या तेहरान के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का विकल्प है। फ्लोरिडा में शुक्रवार को एक रैली के दौरान उन्होंने सीमित सैन्य अभियान शुरू करने की संभावना का भी उल्लेख किया। उनके बयान से क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
वार्ता टूटने के लिए ईरान ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अंतरिम समझौते पर बातचीत में आई रुकावट के लिए अमेरिकी पक्ष को जिम्मेदार बताया। उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि उसकी कार्रवाई से बातचीत प्रभावित हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेहरान समझौते की कोशिशें जारी रखने के लिए तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव ने भी क्षेत्रीय स्थिति को संवेदनशील बना दिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई देशों में अमेरिकी दूतावासों का स्टाफ घटाया
अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही अपने हमलों का दायरा बढ़ा सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब के रियाद स्थित दूतावास और जेद्दा तथा दहरान के वाणिज्य दूतावासों से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को लौटने का निर्देश दिया।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी राजनयिक मिशनों के कर्मचारियों की संख्या कम करने के आदेश भी दिए गए हैं। अधिकारी ने इसके पीछे हूती हमलों और ईरान से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया।
सैन्य कार्रवाई की आशंका से बढ़ी चिंता
अमेरिका और इजराइल की ओर से संभावित सैन्य अभियान की चर्चा के बीच मध्य पूर्व की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वास्तव में हमला करेगा या कूटनीतिक बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुंचने का प्रयास सफल होगा।
