सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। नीदरलैंड्स के द हेग स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (पीसीए) के फैसले के बाद पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की मांग की है। हालांकि, भारत ने पीसीए के फैसले को मानने से साफ इनकार करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
बिलावल भुट्टो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून ने पाकिस्तान के रुख को सही साबित किया है। उनका दावा है कि सिंधु जल संधि अभी भी लागू है और कोई भी देश एकतरफा तरीके से किसी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते को समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने भारत से फैसले और संधि का सम्मान करने की अपील की।
बिलावल ने कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है और नदियों को राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून के साथ खड़ा रहा है और अब भारत को भी संधि का सम्मान करना चाहिए। इससे पहले भी बिलावल इस मुद्दे को लेकर भारत पर तीखी बयानबाजी कर चुके हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। समझौते के तहत सिंधु नदी घाटी की छह प्रमुख नदियों में से तीन पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलुज—के पानी के उपयोग का अधिकार भारत को, जबकि तीन पश्चिमी नदियों—सिंधु, झेलम और चिनाब—का प्रमुख उपयोग पाकिस्तान को मिला।
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना शुरू किया।
पीसीए ने अपने फैसले में संधि से जुड़े विवाद पर विचार किया और जम्मू-कश्मीर में भारत की जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित कुछ मुद्दों पर टिप्पणियां कीं। पाकिस्तान ने फैसले का स्वागत किया, जबकि भारत ने कहा है कि वह इस निर्णय से बाध्य नहीं है। ऐसे में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद आगे भी जारी रहने के आसार हैं।
