‘फॉरएवर केमिकल्स’ का इलाज मिला? जापानी वैज्ञानिकों ने खोजा खास बैक्टीरिया

पानी और मिट्टी में वर्षों तक बने रहने वाले खतरनाक रसायनों से निपटने की दिशा में जापानी वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। कोबे यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नदी की तलछट में ऐसे विशेष बैक्टीरिया की पहचान की है, जो पीएफएएस (PFAS) जैसे ‘फॉरएवर केमिकल्स’ को कम करने में सक्षम हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से भविष्य में दूषित पानी की सफाई के लिए कम लागत वाली तकनीक विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

पीएफएएस ऐसे रसायनों का समूह है, जिनमें कार्बन और फ्लोरिन के बीच बेहद मजबूत रासायनिक बंध होते हैं। यही वजह है कि ये प्राकृतिक वातावरण में आसानी से नष्ट नहीं होते और पानी व मिट्टी में लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं। इसी कारण इन्हें ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है। इनका इस्तेमाल वाटरप्रूफ कपड़ों, नॉन-स्टिक बर्तनों और अग्निशमन फोम जैसे कई उत्पादों में किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों के आसपास इन रसायनों का प्रदूषण अधिक पाया गया है।

कोबे यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हिदेयुकी इनुई के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने ओसाका की सामोंडो नदी की तलछट के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों में वैज्ञानिकों को ऐसे बैक्टीरियल स्ट्रेन मिले, जो पीएफएएस की मात्रा को कम करने में सक्षम पाए गए।

शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला के बाहर भी इस तकनीक का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान एक विशेष बैक्टीरियल स्ट्रेन ने औद्योगिक वेस्ट लैंडफिल से निकलने वाले लीचेट में मौजूद पीएफएएस की मात्रा को काफी कम कर दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया की कोशिकाओं पर रसायनों का अवशोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हालांकि, शोध अभी शुरुआती चरण में है। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि पीएफएएस को कम करने में वास्तविक रासायनिक विघटन और बैक्टीरियल कोशिकाओं द्वारा अवशोषण की भूमिका कितनी है। इसके बावजूद यह खोज लंबे समय से बने पर्यावरणीय प्रदूषण से निपटने के लिए एक संभावित प्राकृतिक और किफायती समाधान की उम्मीद जगाती है।

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