नागालैंड से तमिलनाडु तक के IFS अफसर पहुंचे ‘लेखक गांव’, जानिए क्या देखा

भारतीय वन सर्वेक्षण की उपनिदेशक डॉ. सुगंधा श्रीवास्तव के नेतृत्व में भारतीय वन सेवा (IFS) के नए बैच के 20 अधिकारियों ने बुधवार को देहरादून स्थित ‘लेखक गांव’ का भ्रमण किया। देश के अलग-अलग राज्यों से आए अधिकारियों ने इस दौरान गांव की साहित्यिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय अवधारणा को करीब से समझा। साथ ही इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी ली।

इस प्रशिक्षण दल में नागालैंड, असम, मध्य प्रदेश, गुजरात, सिक्किम, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु सहित विभिन्न राज्यों से आए भारतीय वन सेवा के अधिकारी शामिल रहे। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ‘लेखक गांव’ की परिकल्पना, इसके प्राकृतिक परिवेश तथा साहित्य और संस्कृति के संरक्षण से जुड़े प्रयासों का अवलोकन किया।

अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रकृति के साथ समाज के संबंध को मजबूत करने से जुड़े पहलुओं में भी रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि प्रकृति, साहित्य और संस्कृति के समन्वय से जुड़ी पहलें समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डॉ. सुगंधा श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के लिए इस तरह के अध्ययन और अनुभवात्मक भ्रमण काफी उपयोगी होते हैं। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण को केवल जंगलों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसका संबंध हमारी संस्कृति, साहित्य, स्थानीय समुदायों और प्रकृति के साथ मानव के संबंधों से भी गहराई से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि ‘लेखक गांव’ इन सभी पहलुओं के समन्वय को समझने और उससे सीख लेने का एक प्रेरणादायी अवसर प्रदान करता है। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने गांव की विभिन्न विशिष्ट पहलों और गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।

इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने ‘लेखक गांव’ की अवधारणा को प्रकृति और संस्कृति के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने वाली पहल के रूप में देखा।

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